वैयक्तिक भिन्नता
वैयक्तिक भिन्नता
प्रकृति का यह नियम है कि सम्पूर्ण संसार में कोई भी दो व्यक्ति पूर्णतया एक जैसे नहीं हो सकते। उनमें कुछ न कुछ भिन्नता अवश्य होगी।
वैयक्तिक भिन्नता का विकास-
वैयक्तिक भिन्नता प्रकृति का स्वभाव, गुण एवं देन है।
- वैयक्तिक भिन्नता का आधार वंशानुक्रम तथा वातावरण से प्राप्त गुण होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति में कुछ विशेषताएँ होती हैं, जो कि उसे दूसरे से भिन्न व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
- सर फोसिस गाल्टन, पियर्सन, कैटेल तथआ टरमैन ने वंशानुक्रम का अध्ययन किया और इन शिक्षा शास्त्रियों ने बाल केंद्रित शिक्षा को प्रोत्साहन किया, जिससे बालक की आयु, बुद्धि, रुचि, योग्यता तथा क्षमता का अध्ययन भली-भाँति करके उनके लिए उपयुक्त शिक्षा की व्यवस्था की जा सके।
“बालक की प्रत्येक सम्भावना के विकास का एक विशिष्ट काल होता है। यह विशिष्ट काल वैयक्तिक भेद के अनुसार प्रत्येक में भिन्न-भिन्न होता है, यदि उचित समय पर इस सम्भावना को विकसित करने का प्रयत्न किया गया तो उसके नष्ट होने का भय रहता है।”-- स्किनर
वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ व स्वरूप (Meaning & Nature of Individual Difference)
वैयक्तिक भिन्नता या व्यक्तित्व भेद का अर्थ एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से रूप रंग, शारीरिक गठन, विशिष्ट योग्यताओं, बुद्धि, रुचि, स्वभाव, उपलब्धियों तथा व्यक्तित्व के अन्य गुणों में भिन्न होना है।
स्किनर के अनुसार, “आज हमारा यह विचार है, कि व्यक्तिगत विभिन्नताओं में सम्पूर्ण व्यक्तित्व का कोई भी ऐसा पहलू सम्मिलित हो सकता है, जिसकी माप की जा सके।”
वैयक्तिक भिन्नता की परिभाषाः-
टायलर महोदय के अनुसार इन माप किये जाने वाले विभिन्न पहलुओं में “शरीर के आकार और स्वरूप, शारीरिक कार्यों में गति सम्बन्धी क्षमताओं, बुद्धि, उपल्विधि ज्ञान, रुचियों, अलिवृत्तियों और व्यक्तित्व के लक्षणों में माप की जा सकने वाली भिन्नताओं की उपस्थिति सिद्ध हो चुकी है।
•वैयक्तिक भिन्नता के आधार
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